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Intellectual Property Thefts in India : Creatives Beware

कुछ देर पहले कलाकार श्री मृणाल राय की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखी, जिसमें उन्होंने बताया कि कुछ न्यूज़ चैनल्स ने अपने विज्ञापनों, प्रोमोज़ के बैकग्राउंड में उनका बनाया रावण का चित्र इस्तेमाल किया है । इस Intellectual Property के प्रयोग के लिए मृणाल जी से ना तो संपर्क कर अनुमति ली गयी और ना ही आकर्षक कलाकृति का उन्हें श्रेय दिया गया। ऐसा कलाकारों, लेखकों के साथ अक्सर होता रहता है कि उन्हें पता भी नहीं चलता और उनकी कोई रचना इंटरनेट, टीवी या रेडियो जैसे किसी मनोरंजन के साधन पर Copyright नियम को ताक में रखकर बेशर्मी से प्रयोग कर ली जाती है। विदेशों में कुछ सख्ती है पर भारत में तो ये बात इतनी आम है कि लोग इसे गलत तक नहीं मानते और कामचोरी करने वालों की आदत बन जाती है।

भारत में Copyright एक्ट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन एक्ट जैसे कानून हैं पर उनके अनुसार सज़ा होने और उन्हें प्रभावी रूप से लागू करने और दोषियों को सज़ा दिलवाने में व्यवस्था तंत्र विफल है। संख्या की शक्ति आज के लोकतांत्रिक समाज में सबसे बड़ी शक्ति है। हर क्षेत्र के कलाकारों को इस मामले में एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए ताकि और कड़े नियम बनें जो अच्छे ढंग से लागू हों। साथ ही ऐसे मामलो का पूरा फॉलो-अप करना चाहिए ताकि दोषी को दंड मिले और अन्य लोगो के सामने एक उदाहरण हो। कुछ लोग इतने में खुश हो जाते हैं कि उनका काम (बिना उनके नाम के ही सही) राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर आ गया।

इस मानसिकता के कारण वो कलाकार ना केवल अपना बल्कि कई अन्य कलाकारों का भी नुक्सान करवा देते हैं, क्योकिं Intellectual Property कंटेंट चोरी करने वाले लोगो को बिना किसी घर्षण, मूल्य के अपना मनचाहा काम मिलता रहता है। कलाकार यश ठाकुर बिना नाम लिए एक विज्ञापन एजेंसी में लाखों रुपये की आय पा रहे क्रिएटिव डिज़ाइनर, कंसलटेंट के बारे में बताते हैं कि एजेंसी को मिले प्रोजेक्ट्स में अपनी शिक्षा या अनुभव से कुछ रचनात्मक करने के बजाय वो महाशय अपनी ज़रुरत के हिसाब से पिंटरेस्ट, टंबलर, डेवियंट आर्ट जैसी वेबसाइटस पर लगे अन्य कलाकारों के काम को बेशर्मी से उठा रहे थे। ऐसा केवल यहीं नहीं दुनियाभर में किया जाता है।


INDIAN COMICS PIRACY : RIGHT OR WRONG?


भारतीय व्यवस्था में ढुलमुल रवैये के कारण ऐसा अधिक होता है; शायद इसलिए कि यहाँ आम जनता का मानना है: “चोरी तो किसी वस्तु, धन की मानी जाती है कला की चोरी भी कोई चोरी हुई?” यह बात उन लोगो से पूछें जिन्होंने अपने जीवन के कितने वर्ष, दशक कला में उस स्तर तक आने में लगा दिए। कुछ चालाक लोग कलाकृति के रंगो, आकार या लेख के शब्दों में ऐसा फेरबदल करते हैं कि उनकी नक़ल सॉफ्टवेयर पकड़ नहीं पाते।

कुछ उपाय – सभी कलाकारों को अपना अच्छा नेटवर्क और फॉलोइंग बनाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि उनके Copyright काम की चोरी का मामला किसी प्रशंसक या साथी कलाकार द्वारा उनतक जल्द पहुँचे। बड़े नेटवर्क का फायदा चोरी करने वाले लोगो, कंपनियों पर दबाव बनाने में भी होता है। सॉफ्टवेयर के प्रयोग से नक़ल के या मिलते जुलते काम के कई मामले पकडे जा सकते हैं। अगर किसी कारणवश आपका कोई Intellectual Property काम चोरी हो जाता है और मामला उठाने के बाद भी आपको श्रेय या भुगतान नहीं मिलता तो निराश ना हों।

 


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कोई आपका Intellectual Property काम चुरा सकता है पर अर्जित की हुई कला नहीं! अपनी कला पर ध्यान देते रहें और आगे ऐसा ना हो इसलिए अपने काम को यूँ तिथि, सबूतों के साथ प्रकाशित करें कि कोई विवाद होने पर निर्णय आपके पक्ष में हो। सारा नहीं तो मुख्य रचनात्मक काम Copyright संस्था से पंजीकृत ज़रूर करवा लें। कलाकारों एवम उनके प्रशंसकों के बीच रचनात्मक काम की चोरी करने वाली कंपनियों, लोगो को ब्लैकलिस्ट करें ताकि अधिक से अधिक जनता ऐसे नकलचियों का सामान, सेवा ना खरीदे और ये हतोत्साहित होकर चोरी करना छोड़ दें। बड़े समूह के संसाधन अपने आप बढ़ जाते हैं तो कुछ रीपीट ऑफेंडर्स पर अपने मित्रों की सहायता से मुक़दमे दर्ज किये जा सकते हैं। बार-बार न्यायिक अभियोग ख़बरों में आने से इस विषय पर लोगो में जागरूकता बढ़ेगी और उनका नजरिया बदलेगा।

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